सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए, लेकिन कोर्ट ने इसे आयोग का विशेषाधिकार माना।
इस फैसले से साफ हो गया है कि मतगणना प्रक्रिया पूरी तरह चुनाव आयोग के तय ढांचे के तहत ही होगी।
क्या हुआ:-सुप्रीम कोर्ट ने मतगणना पर्यवेक्षकों की नियुक्ति को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई की।
अदालत ने चुनाव आयोग के अधिकारों को मानते हुए हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
ग्राउंड रियलिटी / खास जानकारी:-TMC ने पर्यवेक्षकों की नियुक्ति और प्रक्रिया पर कई सवाल उठाए थे।
हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने के लिए अधिकृत है।
मुख्य बिंदु:-
मुद्दा: मतगणना पर्यवेक्षकों की नियुक्ति
याचिकाकर्ता: TMC
पक्षकार: कपिल सिब्बल (वरिष्ठ अधिवक्ता)
कोर्ट का रुख: हस्तक्षेप से इनकार
अधिकार: चुनाव आयोग को पूर्ण संवैधानिक अधिकार
क्यों महत्वपूर्ण
यह फैसला चुनाव प्रक्रिया की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को मजबूत करता है।
साथ ही राजनीतिक दलों की भूमिका को सीमित करते हुए आयोग की स्वायत्तता को स्पष्ट करता है।
ताजा अपडेट:-अब मतगणना प्रक्रिया चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षकों की निगरानी में ही संपन्न होगी और सभी दलों को उसी व्यवस्था का पालन करना होगा।