लौंगी भुइँया बताते हैं कि वे रोज मवेशियों को लेकर जंगल जाते और खाली समय में नहर खोदने का काम करते थे। शुरू में गांव के लोग उनके इस प्रयास को पागलपन समझते थे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य पर डटे रहे।
तीन दशक की अथक मेहनत के बाद नहर पूरी तरह तैयार हो गई, जिससे आसपास के गांवों को सिंचाई की सुविधा मिलने लगी है। यह पहल उन किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है, जिन्हें पानी की कमी के कारण खेती में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।
अब वही ग्रामीण, जो पहले उन्हें नजरअंदाज करते थे, उनकी सराहना कर रहे हैं और सरकार से उनके लिए पेंशन व आवास योजना जैसी सुविधाएं देने की मांग कर रहे हैं। लौंगी भुइँया की यह कहानी संघर्ष, समर्पण और समाज के लिए कुछ कर गुजरने की प्रेरणा बन गई है।