सूत्रों के अनुसार, कृषि विभाग ने पहले ही जिलों से फसल विविधीकरण और जल संरक्षण आधारित रणनीतियों का प्रारूप मांग लिया है।
यह पहल किसानों की आय सुरक्षा और सूखे के असर को कम करने के लिए अहम मानी जा रही है।
क्या हुआ:-कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने संभावित सूखे को लेकर उच्चस्तरीय बैठक कर अधिकारियों को निर्देश जारी किए।
सरकार ने सभी जिलों को 12 मई तक आकस्मिक (कंटिजेंसी) योजना तैयार कर प्रस्तुत करने को कहा है।
ग्राउंड रियलिटी / खास जानकारी:-मौसम पूर्वानुमान में कम बारिश की चेतावनी के बाद राज्य स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं।
अधिकारियों के अनुसार, इस बार फोकस सिर्फ राहत नहीं बल्कि खेती को सूखा-रोधी बनाने पर है।
मुख्य बिंदु:-अनुमान: 30–35% तक कम वर्षा की संभावना
डेडलाइन: 12 मई तक जिला योजना प्रस्तुत
फोकस: फसल विविधीकरण और जल संरक्षण
प्राथमिक फसलें: मड़ुआ, उड़द, मूंग, सोयाबीन
तकनीक: ड्रिप इरिगेशन, मल्चिंग, चेक डैम
क्यों महत्वपूर्ण
कम वर्षा का सीधा असर खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
समय रहते रणनीति बनाने से उत्पादन नुकसान कम करने और किसानों की आय सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
ताजा अपडेट:-सरकार ने खरीफ कार्यशाला में विस्तृत कार्ययोजना पेश करने की तैयारी शुरू कर दी है।
साथ ही कृषि विज्ञान केंद्रों और विश्वविद्यालयों के जरिए किसानों को तकनीकी सहायता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
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