बैठक में निर्णय लिया गया कि कोसी परियोजना क्षेत्र का सीमांकन आधुनिक जीपीएस तकनीक से किया जाएगा और बराज क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों पर रोक लगाई जाएगी। साथ ही मानसून से पहले 2.5 किमी लंबा पायलट चैनल बनाने, सैटेलाइट डेटा साझा करने और जल निकासी की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने जैसे महत्वपूर्ण कदम भी तय किए गए।
इसके अलावा नेपाली क्षेत्र में नहरों पर लगे बिजली के खंभों को हटाने और अवैध टैक्स पर रोक लगाने पर भी सहमति बनी है। बाढ़ नियंत्रण कार्यों में लगे वाहनों को अब नेपाली क्षेत्र में निर्बाध आवाजाही की अनुमति मिलेगी, जिससे आपदा प्रबंधन में तेजी आएगी।
इस समझौते से बिहार के सुपौल, मधुबनी और चंपारण जैसे बाढ़ प्रभावित जिलों को राहत मिलने की उम्मीद है। नहरों की मरम्मत से सिंचाई व्यवस्था बेहतर होगी, किसानों की पैदावार बढ़ेगी और भारत-नेपाल के बीच समन्वय भी मजबूत होगा।