पुलिस के अनुसार, इस अवैध वसूली के लिए 100 से ज्यादा बैंक खातों का इस्तेमाल किया जा रहा था और पैसे को धनबाद के गोविंदपुर, बरवाअड्डा, भूली व वासेपुर जैसे इलाकों में प्रॉपर्टी खरीदने में लगाया जा रहा था। सैफी ने यह भी खुलासा किया कि गिरोह के सदस्य 10-15 हजार रुपये लेकर फायरिंग की घटनाएं अंजाम देते थे और इसके बाद व्यवसायियों को धमकाकर रंगदारी वसूली जाती थी।
सैफी की निशानदेही पर पुलिस ने विभिन्न स्थानों पर छापेमारी कर प्रिंस खान के लिए काम करने वाले चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनके पास से नकदी और आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई है। वहीं, अदालत ने सैफी को दोबारा तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है, ताकि गिरोह के अन्य सदस्यों और नेटवर्क की गहराई से जांच की जा सके।
जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ स्थानीय नेताओं की भूमिका संदिग्ध है, जो प्रिंस खान के संपर्क में रहकर विरोधियों को डराने-धमकाने के लिए उसका इस्तेमाल करते थे। पुलिस अब इन सभी पहलुओं की जांच कर रही है, जिससे यह साफ हो गया है कि रंगदारी का यह नेटवर्क संगठित और व्यापक स्तर पर संचालित हो रहा था।