पूछताछ में मेजर ने खुलासा किया कि झरिया की विधायक रागिनी सिंह को दी गई धमकी के पीछे प्रिंस खान का हाथ था, जबकि इसकी साजिश उसके भाई बंटी खान ने जेल में बैठकर रची थी। बंटी खान ने विधायक के बयानों की जानकारी प्रिंस तक पहुंचाई, जिसके बाद धमकी भरा वीडियो जारी किया गया। इस घटना के बाद धनबाद जेल के अंदर तनाव और मारपीट की स्थिति भी पैदा हुई थी।
मेजर ने पुलिस को 60 से 70 ऐसे व्यवसायियों, उद्योगपतियों और ठेकेदारों की सूची भी सौंपी है, जो कथित तौर पर नियमित रूप से रंगदारी देते हैं। पुलिस इन नामों का आयकर रिकॉर्ड, कॉल डिटेल (CDR) और बैंक ट्रांजेक्शन के जरिए मिलान कर रही है, ताकि अवैध वसूली के ठोस सबूत जुटाए जा सकें। इस खुलासे ने शहर के व्यापारिक जगत में चिंता बढ़ा दी है।
जांच में यह भी सामने आया है कि गैंग का नेटवर्क केवल आपराधिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि कुछ राजनीतिक नेताओं, ठेकेदारों और मीडियाकर्मियों से भी गैंग की साठगांठ है। पुलिस को कुछ संदिग्ध बातचीत के प्रमाण मिले हैं, जिनका सत्यापन किया जा रहा है। वहीं, नगर निगम चुनाव के दौरान सिंह मेंशन परिसर में हुई बमबाजी को लेकर मेजर ने प्रिंस खान की संलिप्तता से इनकार किया है, जिससे जांच और जटिल हो गई है।
फिलहाल पुलिस मेजर द्वारा दिए गए इनपुट के आधार पर शहर में सक्रिय स्लीपर सेल, फंड मैनेजर और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान में जुटी है। आने वाले दिनों में बड़े पैमाने पर छापेमारी और गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है, जिससे इस संगठित अपराध नेटवर्क पर बड़ा शिकंजा कस सकता है।
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